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मंगलवार, 27 अप्रैल 2010

62 साल से महिला कलेक्टर-एसपी का इंतजार

बाबूलाल शर्मा
जयपुर . राज्यपाल, मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष और मुख्य सचिव जैसे सर्वोच्च पदों पर महिलाएं जहां खुद को साबित कर चुकी हैं, उसी प्रदेश की राजधानी जयपुर के लिए यह हैरानी की बात है कि आज तक एक भी महिला कलेक्टर और एसपी के पद पर नहीं रही। काबिलेगौर है कि जयपुर में इन पदों  सृजित हुए 62 साल हो चुके हैं।


यदि मामला राजधानी की संवेदनशीलता या प्रशासनिक पेचीदगियों का भी हो तो जयपुर से कहीं ज्यादा संवेदनशील माने जाने वाले टोंक में कलेक्टर और एसपी दोनों महिला अफसरों की मौजूदगी से यह बात खारिज हो जाती है। यही नहीं अजमेर जैसे संवेदनशील जिले में अब तक चार महिलाएं कलेक्टर और श्रीगंगानगर में उस समय महिला एसपी तैनात थी जब घड़साना में हिंसक आंदोलन चरम पर था। जयपुर में डिवीजनल कमिoAर के अहम पद पर महिला आईएएस तैनात हैं, महापौर भी महिला हैं लेकिन राजधानी को अभी भी कलेक्टर-एसपी का इंतजार है।


अब तक 22 जिलों में महिलाएं कलेक्टर: राजस्थान कैडर की वर्तमान में 28 महिला आईएएस हैं। इनमें से पांच दिल्ली में नियुक्त हैं। राज्य में 22 जिलों में महिलाएं कलेक्टर रह चुकी हैं। वर्तमान में बूंदी, बीकानेर, भीलवाड़ा व टोंक में महिला कलेक्टर हैं।


11 जिलों को नहीं मिली कमान : राजधानी जयपुर समेत ऐसे 11 जिले हैं जिनमें कभी महिला आईएएस कलेक्टर के पद पर नियुक्ति नहीं हुई। इन जिलों में उदयपुर, अलवर, झुन्झुनूं, जोधपुर, बारां, चूरू, झालावाड़, प्रतापगढ़, बाड़मेर, और जैसलमेर शामिल हैं।


13 आईपीएस महिलाएं : जयपुर में आज तक कोई महिला अफसर फील्ड पोस्टिंग में एसपी नहीं लगी। प्रदेश में कुल 159 आईपीएस हैं जिनमें से 13 आईपीएस महिलाएं हैं। राजस्थान कैडर की पहली महिला आईपीएस 1989 मे नीना सिंह बनीं। इससे पहले एकमात्र आईपीएस बादाम बैरवा रही थीं। जो आरपीएस से आईपीएस बनी। प्रदेश में 12 जिले ऐसे हैं जहां महिलाओं ने पुलिस की कमान संभाली।


वर्तमान में तमिलनाडु में लतिका शरण पुलिस महानिदेशक के पद पर हैं, यही नहीं उत्तराखंड में भी कंचन चौधरी डीजीपी रह चुकी हैं तो फिर जयपुर में अभी तक किसी महिला आईपीएस को फील्ड पोस्टिंग के रूप में एसपी नहीं लगाना चिंताजनक है। जयपुर की पहली पुलिस कमिश्नर महिला आईपीएस बने।
- पीके तिवारी, रिटायर्ड डीजीपी, राजस्थान


पूर्व मुख्य सचिव रह चुकी कुशल सिंह कोटा में कलेक्टर रही थीं, अजमेर, बीकानेर, उदयपुर संभाग मुख्यालयों पर जब कलेक्टर का काम महिलाएं बखूबी संभाल चुकी हैं तो जयपुर में भी कलेक्टर के पद पर किसी महिला अफसर को लगाने में क्या हर्ज है?


- इंद्रजीत खन्ना, पूर्व मुख्य सचिव, राजस्थान

रविवार, 25 अप्रैल 2010

सांसद, कलेक्टर-एसपी के घर भी दूषित पानी

बाबूलाल शर्मा
जयपुर. क्या आप यकीन करेंगे- शहर का आम आदमी ही नहीं बल्कि सांसद, कलेक्टर, विधानसभा सचिव और पुलिस अधीक्षक तक प्रदूषित पानी पी रहे हैं। यह खुलासा भास्कर की ओर से कराई गई पानी की जांच में हुआ है। हां, राज्य के मुख्य सचिव और डीजीपी के घरों में जलदाय विभाग साफ पानी की सप्लाई कर रहा है।


भास्कर ने मुख्य सचिव टी श्रीनिवासन, डीजीपी हरीश चंद्र मीणा, सांसद महेश जोशी,न्यायाधिपति प्रेमशंकर आसोपा, कलेक्टर कुलदीप रांका, एसपी (साउथ) जोस मोहन व विधानसभा सचिव एच आर कुड़ी के बंगलों, नगर निगम मुख्यालय व एसएमएस अस्पताल परिसर से पानी के सैंपल लेकर इनकी ज्ञान विहार यूनिवर्स की प्रयोगशाला में जांच कराई तो परिणाम हैरान करने वाले निकले। मुख्य सचिव व पुलिस महानिदेशक के बंगलों के ही सैंपल तय मानकों पर खरे उतरे, बाकी 7 नमूनों में हानिकारक तत्व पाए गए।

सांसद, विधानसभा सचिव , न्यायाधीश , कलेक्टर तथा एसपी के बंगले के पानी में प्रदूषक तत्वों की मात्रा मिली। इनके यहां अपारदर्शी (गंदला) पानी मिला। इस पानी में स्माल पार्टिकल और स्लाइट व मोर टर्बिडिटी के रूप में मिले आर्गेनिक पोल्यूटेंट्स के लगातार इस्तेमाल से इन बंगलों में रह रहे लोगों की सेहत गड़बड़ा सकती है। वहीं नगर निगम मुख्यालय में आम जन के लिए लगाए गए वाटर कूलर में मोर टर्बिड यानी सर्वाधिक प्रदूषक तत्व मिले हैं। एसएमएस अस्पताल में बांगड़ के बाहर सार्वजनिक नल का पानी भी पीने योग्य नहीं है। डीजीपी, कलेक्टर, निगम मुख्यालय और एसएमएस अस्पताल परिसर के पानी में क्षारीय व अम्लीय तत्व भी बॉर्डर लाइन पर है।


जांच में कलेक्टर, एसपी, विधानसभा सचिव के बंगलों और नगर निगम मुख्यालय में सब रजिस्ट्रार कार्यालय के पास लगे वाटर कूलर के पानी में टीडीएस की मात्रा भी खतरनाक स्थिति में है। अमेरिकन स्टैंडर्डस के मुताबिक पानी में 500 एमजी/लीटर तथा डब्ल्यूएचओ के अनुसार 600 एमजी/लीटर तक टोटल डिजोल्वड सोलिड (टीडीएस) होना चाहिए लेकिन यहां इसकी मात्रा 800 के ऊपर हैं, वहीं निगम मुख्यालय के पानी में तो यह मात्रा 1200 को भी पार कर गई। दिलचस्प तथ्य यह है कि राजस्थान में भी टीडीएस की स्वीकार्य सीमा 500 एमजी/लीटर ही है, लेकिन अधिकतम सीमा बढ़कर 2000 तक हो गई। विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही अधिकतम सीमा 2000 हो, लेकिन डब्ल्यूएचओ के अनुसार ६00 से ऊपर टीडीएस सेहत के लिए खतरनाक है।


मुख्य सचिव, डीजीपी के यहां साफ पानी


पानी की सैंपल जांच में जहां सांसद, कलेक्टर और अन्य अफसरों के यहां प्रदूषित पानी मिला वहीं राज्य के मुख्य सचिव और डीजीपी के बंगलों में जलदाय विभाग साफ पानी सप्लाई कर रहा है। इनके यहां न तो टर्बिडिटी पाई गई और न ही अन्य प्रदूषक तत्व। आश्चर्यजनक तथ्य यह भी है कि इन दोनों ही जगह पर लिए गए सैंपल न सिर्फ अमेरिकन स्टैंडर्ड बल्कि इंडियन स्टैंडर्ड के अनुसार भी खरे साबित हुए। यहां डीडीएस की मात्रा क्रमश: 422 और 354 थी जबकि परमानेंट हार्डनेस भी स्टैंडर्ड के दायरे में मिली।


बीसलपुर से आता है साफ पानी, जलदाय विभाग कर देता है गंदा


भास्कर ने आला अधिकारियों के अलावा बीसलपुर से आने वाले पानी की जलदाय विभाग की गांधीनगर स्थित प्रयोगशाला में भी जांच कराई। ये सैंपल बीसलपुर प्रोजेक्ट के बालावाला पंप हाउस पर बने स्टोरेज टैंक, जवाहर सर्किल पर बने स्टोरेज टैंक और मालवीय नगर सेक्टर दो से लिए गए। जांच में बीसलपुर से आने वाला पानी मानकों पर खरा उतरा है। ऐसे में सवाल उठता है कि बीसलपुर से जयपुर में आने के बाद घरों में जो पानी पहुंच रहा है क्या वह जलदाय विभाग की जर्जर हो चुकी लाइनों के कारण प्रदूषित हो रहा है? क्योंकि अब तक दूषित पानी के जितने भी मामले सामने आए हैं, उनमें सीवरेज लाइनों की मिक्सिंग प्रमुख कारण रहा है। पीएचईडी की प्रयोगशाला में सीनियर केमिस्ट सीमा गुप्ता ने जांच रिपोर्ट सौंपते हुए कहा कि बीसलपुर के पानी के सैंपल पूरी तरह प्रदूषण मुक्त है।


टर्बीडिटी क्या?


पानी में टर्बीडिटी इसमें पाए जाने वाले तत्वों के कारण होती है, जो पानी को गंदला बना देती है। इनमें रेत और अन्य तत्वों के कण शामिल हैं। 5 एनटीयू से कम टर्बीडिटी वाला पानी ही पीने के लिहाज से ठीक है।


विशेषज्ञों ने बताया- बीमारियों का पानी


9 सैंपलों में से 7 में टर्बिडी मिली। चार सैंपलों में


टीडीएस की मात्रा यूएसए स्टैंडर्ड 500 के बजाय 800 और 1200 एमजी प्रति लीटर मिली, जो पेट की बीमारियां का प्रमुख कारण है। सभी सैंपलों में जल की स्थायी कठोरता तय मापदंड से ज्यादा है, जो हड्डियों, पित्ताशय, लीवर और गुर्दो के लिए खतरा है।


- डॉ. आर. सी. छीपा, सेंटर हैड (सीएडब्ल्यूएम), ज्ञान विहार यूनिवर्स, जयपुर


ज्यादा टर्बिड पानी प्रदूषित तत्वों की मात्रा ज्यादा होती है। इस पानी के क्लोरीनेशन के बावजूद बैक्टीरिया जीवित रह जाते हैं और वे शरीर में जाकर गंभीर बीमरियां फैला सकते हैं।


— डॉ. एस. एस. ढींढसा, रिटायर्ड चीफ केमिस्ट, पीएचईडी प्रयोगशाला, जयपुर