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गुरुवार, 6 मई 2010

2000 करोड़ की पड़ेगी सलाह!

संजय सैनी
bhaskarजयपुर. अगर योजना आयोग की मंशा पर अमल हुआ तो राजधानी में बस रैपिड ट्रांसपोर्ट सिस्टम (बीआरटीएस) और मेट्रो ट्रेन के मार्ग में भारी बदलाव हो सकता है, यानी सारी कवायद नए सिरे से शुरू करनी पड़ सकती है। लिहाजा बीआरटीएस व मेट्रो की लागत 7 हजार करोड़ रु. से बढ़कर 9 हजार करोड़ रु. तक हो सकती है।


आयोग चाहता है कि बीआरटीएस जेएलएन मार्ग पर और मेट्रो टोंक रोड पर चले। उसके सलाहकार (इन्फ्रास्ट्रक्चर) गजेन्द्र हल्दिया ने पिछले दिनों जेडीए अधिकारियों के साथ हुई समीक्षा बैठक में इस मंशा को जाहिर कर दिया है। हल्दिया जानना चाह रहे थे कि बीआरटीएस का काम क्यों रोका गया। जब उन्हें बताया गया कि टोंक रोड पर जगह की कमी के कारण बीआरटीएस आगे नही बढ़ पा रहा है, तो उन्होंने सुझाव दिया कि जगह की कमी को देखते हुए जेडीए को जेएलएन मार्ग का उपयोग करना चाहिए। इससे कॉरिडोर बनाने में दिक्कत नहीं होगी और बसें भी आसानी से चल सकेंगी। चूंकि टोंक रोड पर यातायात अधिक रहने के कारण मेट्रो को एलीवेटेड ट्रैक पर लाया जा रहा है तो कोई दिक्कत नहीं आएगी।


पहले चरण में न्यू गेट से एयरपोर्ट तक : इस सुझाव को देखते हुए जेडीए ने बीआरटीएस की बसों को जेएलएन मार्ग पर उतारने की तैयारी भी कर ली है। नई खेप आने के बाद इस रूट पर बसों को चलाया जाएगा। पहले चरण में बीआरटीएस की बसें न्यू गेट से एयरपोर्ट तक चलाई जाएंगी। वर्तमान में जो बसें चल रही हैं उनका रास्ता बदलकर जेएलएन मार्ग पर लाया जाएगा। एयरपोर्ट पर फ्लाइट के आने-जाने के समय बसों की संख्या बढ़ा दी जाएगी।


वीआईपी मार्ग नहीं रहेगा : जेएलएन मार्ग पर बीआरटीएस सिस्टम आने के बाद यह वीआईपी मार्ग नहीं रहेगा। यह बात जेडीए के अधिकारियों ने गजेन्द्र हल्दिया को बताई थी, लेकिन उनका यह तर्क उनके गले नहीं उतरा। उनका कहना था कि जब सड़क पर यातायात ठीक करना है और ट्रैफिक को कंट्रोल करना है तो जेएलएन मार्ग पर बीआरटीएस लाना पड़ेगा। वैसे भी बजाजनगर तक मेट्रो आ रही है तो बीआरटीएस भी आ सकती है।


कैसे लागू करेंगे : जयपुर में बीआरटीएस का काम आगे बढ़ाना है तो 300 करोड़ रु. की जरूरत के बारे में जेडीए ने नगरीय विकास विभाग को पत्र लिखा है। हालांकि पहले जेडीए के अधिकारियों को नगरीय विकास मंत्रालय को संतुष्ट करना होगा कि बीआरटीएस कैसे लागू करेंगे।


तैयार कोरिडोर एक साल से बंद: जेडीए ने सीकर रोड पर एक साल से बीआरटीएस कोरिडोर बना रखा है, पर इसमें बसें नहीं चलाई जा रही हैं। फिलहाल बीआरटीएस की बसों को उन मागरे पर चलाया जा रहा है जिन पर यात्री भार अधिक है। दूसरी खेप में आने वाली बसों को इस कोरिडोर में उतारा जाएगा।


लागू करने में दिक्कतें : जेडीए आयुक्त सुधांश पंत से जब इस मामले में बात की गई तो उनका कहना था कि यह सुझाव अच्छा है, लेकिन इसे लागू करने में कई दिक्कतें हैं। टोंक रोड पर बीआरटीएस का काफी काम हो गया है। दुर्गापुरा में एलीवेटेड बनाने का काम चल रहा है। टोंक रोड चौड़ी की जा रही है। न्यू गेट से एयरपोर्ट तक बसें चलाई जा सकती हैं। जेसीटीएसएल इस दिशा में काम कर रहा है। बाकी फैसला करने का काम सरकार का है।

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