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शनिवार, 31 जुलाई 2010

खामियों का कॉरिडोर, उद्घाटन आज

बाबूलाल शर्मा
जयपुर. जयपुर में तेज और सुरक्षित यातायात के लिए अपनाया गया बस रेपिड ट्रांजिट सिस्टम (बीआरटीएस) खामियों का कॉरिडोर बन गया है। अब तक 65 करोड़ रु. खर्च किए जाने के बावजूद यह अपने उद्देश्य को पूरा करता नजर नहीं आ रहा। जगह-जगह कट और जंक्शन के कारण कॉरिडोर में लो फ्लोर बसें गति नहीं पकड़ पा रही हैं।

ऐसी कई खामियां हैं, जो सीकर रोड पर वीकेआई नंबर 14 से अंबाबाड़ी तक 7.1 किमी के इस ऑपरेशनल कॉरिडोर के डिजाइन पर सवाल खड़े कर रही हैं। वैसे तो कॉरिडोर सितंबर 09 में तैयार हो गया और इसमें बसें भी दौड़ने लगीं, लेकिन शनिवार को केंद्रीय शहरी विकास मंत्री एस. जयपाल रेड्डी इसका फीता काटेंगे। भास्कर ने शुक्रवार को जब बीआरटीएस एक्सपर्ट कन्सलटिंग इंजीनियर्स ग्रुप लि. व मेरिडियन स्पेस फॉर प्लानिंग एंड क्रियेटिविटी के विशेषज्ञों के साथ मौके की पड़ताल की तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।

शहरी विकास मंत्री जयपाल रेड्डी आज जयपुर में

शहरी विकास मंत्री एस. जयपाल रेड्डी शनिवार को जयपुर में जवाहरलाल नेहरू नेशनल अरबन रिन्युअल मिशन (जेएनएनयूआरएम) के तहत शुरू की गई बीआरटीएस बस का सुबह 11 बजे उद्घाटन करेंगे। वे इसके बाद सेंट्रल पार्क में जयपुर बस के इनोवेशन को लेकर लगने वाली प्रदर्शनी का उद्घाटन करेंगे।

वे शुक्रवार को ही जयपुर पहुंच गए। नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन मंत्री शांति धारीवाल ने बताया कि रेड्डी से जेएनएनयूआरएम के तहत चल रही योजनाओं यूआईडी, यूआईडीएसएसएमटी, आईएचएसडीपी और बीएसयूपी के तहत फंड अलोकेशन को लेकर बात होगी। जयपुर मेट्रो के प्रोजेक्ट को लेकर भी रेड्डी से बात करेंगे कि केन्द्र सरकार इसके लिए अधिक से अधिक सहायता राशि जारी करे।

ऐसा तो नहीं होना चाहिए रैपिड सिस्टम

कॉरिडोर में 11 रोड कट। 13 रेड लाइट। इस कारण रेंगती हैं लो फ्लोर बसें। बस स्टॉप पर आने के लिए न फुट ओवरब्रिज न अंडरपास, हादसे का खतरा। पार्किग लॉट नहीं। स्लिप लेन में खड़े होते हैं वाहन, यातायात प्रभावित। 35-40 मीटर चौड़े कॉरिडोर में न वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम और न ही ड्रेनेज।

किराया ज्यादा, समय बराबर

भास्कर रिपोर्टर ने चौमूं पुलिया से रोड नंबर 14 तक मिनी बस और लो फ्लोर बस में अलग-अलग सफर किया। दोनों बसों में सफर पर 17 मिनट का समय लगा, बल्कि लो फ्लोर में एक रुपया किराया ज्यादा देना पड़ा। मिनी बस ने 6 और लो फ्लोर ने सात रु. किराया वसूला।

फ्लाईओवर जरूरी

जितने भी बस स्टॉप हैं उन पर फुट ओवर ब्रिज बनने जरूरी हैं। बस तेज गति से चले इसके लिए जंक्शन पर फ्लाईओवर भी जरूरी हैं। - विश्वास जैन, प्रबंध निदेशक, सीईजी

पानी रिचार्ज सिस्टम नहीं

कॉरिडोर में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम जरूरी है। अगर यह होता तो 25 मिमी बारिश में ही 55 लाख लीटर पानी रिचार्ज होता। - मोहित सक्सेना, निदेशक मेरिडियन कंसल्टेंसी

बसें लो फ्लोर, स्टॉपेज हाई फ्लोर

बस रूट चार्ट व डिस्पले बोर्ड की व्यवस्था नहीं है। पार्किग स्थल भी नहीं है। बस लो फ्लोर है, लेकिन बस स्टॉप हाई फ्लोर। चढ़ने-उतरने में दिक्कत आ रही है। - वीनू जैन, सिविल इंजीनियर, यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ हैम्प्टन (यूके)

1 टिप्पणी:

  1. sharma ji, mere blog ki yatra ke liye thx.
    maine aap ka blog bhi dekha.. eak suzaw dena chahta hu.
    aap apne blog par to khabro ka postmartam to kar hi sakte hai. akhabar me hamari seema hoti hai, par blog to apna hai isme khabro se aage ki baat bhi karna chahiye aap ko, rochakta aur bad jayegi.

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