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रविवार, 22 अगस्त 2010

खेलों के पावर गेम में अफसर

बाबूलाल शर्मा
जयपुर. राजस्थान में जहां आईएएस और आरएएस अफसरों की कमी बनी हुई है, वहीं प्रशासनिक कामकाज को बेहतर करवाने की चिंता छोड़ सरकार अफसरों से खेल संघों की राजनीति करवा रही है। हाल ये हैं कि विकास योजनाएं बनाने का काम छोड़ अफसर खेलों के पावर गेम में उलझे हुए हैं। कई अफसर ऐसे भी हैं जो खेल संघों में आला पदों पर तो हैं, लेकिन प्रशासनिक व्यस्तता के कारण खेलों की सुध ही नहीं ले पा रहे हैं।

दिलचस्प तथ्य यह भी है कि खेल संघों में आईएएस, आरएएस व आईपीएस अधिकारियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए राज्य सरकार ने जून २००६ में एक सकरुलर जारी किया था, जिसमें यह स्पष्ट निर्देश था कि अधिकारी किसी भी संघ या संस्था से जुड़ने से पहले सरकार की अनुमति ले। क्योंकि इन संघों व संस्थाओं में फंड कलेक्शन होता है। सरकार की हिदायत के बावजूद किसी भी अफसर ने अनुमति लेना मुनासिब नहीं समझा। खेल संघों में अफसरों की सक्रियता को लेकर पिछले दिनों हाईकोर्ट भी कड़ी टिप्पणी कर चुका है।

कौन, किस पद पर

आईएएस संजय दीक्षित : आरसीए व राज्य टेनिस संघ के सचिव
आईएएस अजीत कुमार सिंह : टेबल टेनिस संघ के अध्यक्ष (सिंह का कहना है- सरकार को सूचित किया हुआ है। )
आरएएस बीएल जाटावत : टेबल टेनिस जयपुर संघ के अध्यक्ष
आरएएस अजय सिंह चित्तौड़ा : कैरम संघ के अध्यक्ष
आईपीएस नवदीप सिंह : गोल्फ संघ के सचिव
आईएएस निरंजन आर्य : राज्य जिम्नास्टिक संघ के अध्यक्ष
आरएएस एलसी असवाल : बॉल बैडमिंटन संघ के अध्यक्ष
आयकर आयुक्त दिलीप शिवपुरी : जयपुर जिला बैडमिंटन संघ के अध्यक्ष

पहले खुद अब पत्नी

रॉलबॉल संघ के गठन के बाद आईएएस अधिकारी मनोहरकांत इसके अध्यक्ष बने थे। तब मनोहरकांत राज्य खेल परिषद के अध्यक्ष थे। बाद में उन्होंने पद छोड़ दिया, लेकिन पत्नी सरिता कांत को इस पद पर काबिज कर दिया।
ये कहते हैं अफसर

अब ले लूंगा अनुमति

मैं करीब दो साल से जिम्नास्टिक संघ का अध्यक्ष हूं। डीओपी से अनुमति लेने की अनिवार्यता का पता नहीं था। अब अनुमति लूंगा। - निरंजन आर्य, वाणिज्य कर आयुक्त

और अधिकारी भी तो हैं

मैं बैडमिंटन संघ, जयपुर का जिलाध्यक्ष पिछले दस साल से हूं। अनुमति के बारे में आप क्यों पूछ रहे हैं, और भी तो अधिकारी खेल संघों में हैं। - दिलीप शिवपुरी, आयकर आयुक्त, जोधपुर

शायद मेरा बेटा सचिव है

मैं अभी सचिव नहीं हूं। मेरी पत्नी गोल्फ संघ की अध्यक्ष हैं। अब शायद मेरे बेटे को उन्होंने सचिव बना रखा है। - नवदीपसिंह, एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर)

(भले ही नवदीपसिंह खुद को सचिव नहीं मानते हों लेकिन खेल परिषद के रिकॉर्ड में वे ही सचिव हैं।)
अनुमति की कहां जरूरत है

मैं पांच साल से बाल बैडमिंटन संघ का अध्यक्ष हूं। सरकार से अनुमति लेने की कहां जरूरत है। हां मैं दौसा में तैनात हूं लेकिन जब मीटिंग होती है तो चला जाता हूं। - एलसी असवाल, कलेक्टर, दौसा

यह फुल टाइम वर्क थोड़े है

पांच छह साल से टेबल टेनिस संघ का जिलाध्यक्ष हूं। सरकार से अनुमति तो मैंने नहीं ली। हां सीएमओ में हूं लेकिन रुटिन वर्क प्रभावित नहीं होता। - बीएल जाटावत, उप सचिव, मुख्यमंत्री कार्यालय

मैं पहले था, अब मेडम है

रॉलबॉल संघ से पहले मेरा जुड़ाव रहा था। मैं अध्यक्ष था। बाद में इस संघ की अध्यक्ष मेरी पत्नी बन गई। - मनोहरकांत, प्रमुख सचिव, श्रम विभाग

.और हां-ना करते रहे कार्मिक सचिव


क्या अफसरों ने खेल संघों में पदाधिकारी बनने से पहले सरकार से अनुमति ली है? अनुमति नहीं लेने वालों पर क्या कार्रवाई होगी? कार्मिक विभाग के प्रमुख सचिव खेमराज तीन दिन में भी इस सवाल का जवाब नहीं दे पाए। भास्कर संवाददाता उनके कार्यालय भी गए, बावजूद कोई जवाब नहीं मिला। उनके मोबाइल नंबर ९४१४०६४८४८ पर फिर से सवाल दोहराया गया तो वे कभी हां और कभी ना में जवाब देते रहे।


कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए

अफसरों का काम योजनाएं बनाकर जन सेवा करना है, लेकिन वे पावर गेम में फंस गए हैं। सरकार को चाहिए कि खेल संघों से जुड़ने वाले अफसरों से पूछे कि क्या उन्होंने अनुमति ली है। यदि नहीं तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। - मिट्ठालाल मेहता, पूर्व मुख्य सचिव

1 टिप्पणी:

  1. bahut hi badiya khabar. afasaron ki apane kam ke bajay khelon main sakriy rahane ka jo mamla aap samane lekar aaye hain kabile tareef hai. aisi khinchai se hi afasarsahi apani duty ke prati imandar rahegi. badhai.

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