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रविवार, 26 जून 2011

100 साल तक बुझाई प्यास, क्या प्यासा रह जाएगा रामगढ़

जयपुर. करीब 100 साल तक जयपुर की प्यास बुझाने वाला रामगढ़ बांध क्या प्यासा ही रह जाएगा? अपनी सुविधा के लिए हमने 415 जख्म (एनीकट्स/ चेकडेम) दिए। अब यह आखिरी सांसें गिन रहा है तो प्रशासन, सरकार ने लावारिस छोड़ दिया..लेकिन इनसे भी ज्यादा जिम्मेदार हम हैं, जो यह सब चुपचाप देख रहे हैं।

भराव क्षेत्र में फार्म हाउस, मकान: पिछले वर्षो में बांध के भराव क्षेत्र में पानी रुकने के बाद लोगों ने कब्जे करने शुरू कर दिए। बांध के बीचोंबीच न सिर्फ कच्चे-पक्के मकान बन गए बल्कि भराव क्षेत्र में खेती भी होने लगी है। जमवारामगढ़ तहसीलदार कृष्णदत्त पांडेय मानते हैं कि बांध क्षेत्र की सरकारी जमीनों पर कब्जे के मामले बढ़े हैं। उन्होंने बताया कि ऐसे 100 मामलों में हाल ही लोगों पर जुर्माना और फसलें जब्त करने की कार्रवाई की है। इसके अलावा बांध क्षेत्र में पूर्व जयपुर राजघराने की जमीनों पर कई लोगों के फार्म हाउस और कुएं बन गए हैं। इनमें से कई जमीनों के मामले सीलिंग और अन्य कानून के तहत अदालतों में भी चल रहे हैं।

बाणगंगा नदी में बना दी सड़कें: बांध का अस्तित्व मिटाने पर उतारू स्थानीय प्रशासन की लापरवाही का आलम यह है कि रामगढ़ बांध की महत्वपूर्ण नदी बाणगंगा में सड़कें तक बना दी गईं। सामरेड़ कलां से गोडयाना होते हुए टोडामीणा तक जाने वाले पुराने रास्ते पर दो साल पहले खुद पंचायत समिति जमवारामगढ़ के बीडीओ और इंजीनियरों ने सड़क बनाने का फैसला कर लिया। यह सड़क नदी में से होती हुई जमवारामगढ़ विधायक गोपाल मीणा के गांव तक जाती है। गोडयाना पंचायत के पटवारी रामजीलाल शर्मा से जब नदी में बनी सड़क के बारे में बात की तो उन्होंने कहा, अधिकारियों का फैसला था, इसमें मैं क्या कर सकता हूं? वैसे अब्दुल रहमान बनाम सरकार मामले में सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देश हैं कि नदी-नालों का बहाव किसी भी स्थिति में रोका नहीं जा सकता।

माधोबेणी नदी के बीच कॉलोनी काटी: शाहपुरा तहसील के गांवों और पहाड़ों का पानी रामगढ़ बांध तक पहुंचाने वाली ताला नदी की सहायक माधोबेणी नदी में बिशनगढ़ के नजदीक किसी कॉलोनाइजर ने कॉलोनी ही काट दी। नदी के पेटे में बीचोंबीच तारबंदी करके भूखंड काटे गए हैं और तारबंदी के पिलरों पर बाकायदा नंबर भी डाल रखे हैं। इस मामले में जब शाहपुरा तहसीलदार रमेशचंद्र चौधरी से बात की गई तो उन्होंने बताया कि नदी में खातेदारी की जमीन है, उसी में यह कॉलोनी काटी है, लेकिन लैंडयूज की प्रक्रिया हुए बिना ही कॉलोनी बसाना अवैध है। हम इसे हटाने की कार्रवाई करेंगे।

अब बांध के पाताल से निकाल रहे हैं पानी: बांध सूखने के बाद अब इसके पाताल से पानी निकालकर जयपुर को सप्लाई किया जा रहा है। बांध के बीचोंबीच जलदाय विभाग 6 ट्यूबवैल से पानी ले रहा है। पहले यहां 8 ट्यूबवैल थे जिनमें से दो सूख गए। इसके अलावा रोडा नदी, ढूंढ नदी और जामडोली में कुल 50 ट्यूबवैल खोदे जा चुके हैं। सभी ट्यूबवैलों का पानी बंध गेट स्थित जलदाय विभाग के पंप हाउस पर एकत्र कर जयपुर के लक्ष्मण डूंगरी पंप हाउस भेजा जाता है। जलदाय विभाग के एक्सईएन सत्येंद्र चौधरी के अनुसार रोजाना 12 एमएलडी (120 लाख लीटर) पानी लक्ष्मण डूंगरी पंप हाउस को मिल रहा है, जो चारदीवारी क्षेत्र में सप्लाई किया जाता है।

जिम्मेदार कौन?

‘सरकार’ को सरकार के निर्देश का इंतजार - महिपाल मदेरणा, सिंचाई मंत्री(20 सालों में भाजपा-कांग्रेस सरकारों के सभी सिंचाई मंत्री जिम्मेदार )

करना था यह: विभाग के मंत्री होने के नाते बांध को बचाने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी इन पर थी। बिना एनओसी एनीकट बनने देने वाले विभागीय अधिकारियों पर कार्रवाई करवानी थी।
किया यह: एनीकट बनते रहे। विभाग से सूचनाएं आती रहीं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की।
कहा: शुक्रवार से मोबाइल नंबर ९४१४१३४६00 पर संपर्क करने की कोशिश की, पर मदेरणा व्यस्त रहे।

रामलुभाया, प्रमुख सचिव, सिंचाई विभाग

करना था यह: बांध में पानी आने के रास्तों में अतिक्रमण रोकने के लिए लगातार पेट्रोलिंग करवानी थी, ताकि पानी में रुकावट नहीं हो।
किया यह: दूसरे विभागों से समन्वय नहीं बना पाए। इसके कारण सिंचाई विभाग को पता ही नहीं लगा कि बांध में एनीकट बन रहे हैं।
कहा: एनीकट तोड़ने पर ही आ सकता है बांध में पानी, लेकिन इस बारे में फिलहाल सरकार के पास कोई योजना नहीं।

राव राजेंद्र सिंह, विधायक, शाहपुरा

करना था यह: खुद के विधानसभा क्षेत्र में बन रहे एनीकटों की उपयोगिता की जांच करते। यह देखते कि एनीकट्स की वजह से बांध के भराव पर तो असर नहीं होगा।
किया यह: खुद ने ही अरडकी डेम बनवाकर माधोबेणी नदी के बहाव में रुकावट डाल दी।
कहा: हां हमने अरडकी बांध बनवाया था। हम चाहते थे कि इसकी ऊंचाई और बढ़े, लेकिन इसकी अनुमति नहीं मिली।

गंगासहाय शर्मा, विधायक, आमेर

करना था यह: आमेर विधानसभा क्षेत्र में बांध के कैचमेंट एरिया में हुए अतिक्रमणों को रुकवाना था।
किया यह: क्षेत्र में अब तक 128 एनीकट बन चुके हैं। बहाव क्षेत्र में बन रहे एनीकटों को रोकने का कोई प्रयास नहीं किया।
कहा: मेरे क्षेत्र में रामगढ़ बांध के कैचमेंट एरिया में कोई रुकावट पैदा नहीं हो रही है। कोई एनीकट नहीं बनाया गया है।

नवीन महाजन, कलेक्टर, जयपुर

करना था यह: जिले में पानी के परंपरागत बहाव क्षेत्रों में अतिक्रमण रोकने की जिम्मेदारी निभाते हुए विराटनगर, शाहपुरा, आमेर और जमवारामगढ़ के स्थानीय प्रशासन को कार्रवाई के निर्देश देते।
किया यह: इस बारे में कोई प्रभावी उपाय नहीं किए गए।
कहा: सरकार से निर्देश मिलने के बाद ही एनीकट हटाने की कार्रवाई की जा सकेगी।

नदियों को फिर से जीवित करना होगा: बांधों को बचाए बिना आबादी को नहीं बचाया जा सकेगा। बांध बचाने के लिए नदियों को फिर से जीवित करना होगा। रामगढ़ बांध की हत्या सरकार के ही हाथों हुई है। इसका मोटा कारण है सरकार के विभागों में को-ऑर्डिनेशन नहीं होना। हम नीतियां जब तक पानी को केंद्रित रखकर नहीं बनाएंगे, यही हाल होंगे। रामगढ़ बांध को पुनर्जीवित करने का एक ही तरीका है कि कैचमेंट एरिया का सर्वे करके पानी के बहाव को रोक रहे एनीकट और चेकडेम तोड़े जाएं। नदियों के पेटे में हो रहे अतिक्रमणों को हटाया जाए। इसके साथ ही सरकार को चाहिए कि विकास की जितनी भी नीतियां बनाएं, उनके मूल में पानी के संरक्षण के उपाय जरूर हों। पानी को लेकर सरकार चेतेगी तभी बांध, नदियां और हम बच सकेंगे। बनास के कैचमेंट एरिया में भी 27000 छोटे-बड़े एनीकट और बंधे बन चुके हैं, जल्दी ही नहीं चेते तो बीसलपुर बांध की स्थिति भी रामगढ़ बांध जैसी हो जाएगी। - प्रो. एमएस राठौड़, डायरेक्टर, पर्यावरण एवं विकास अध्ययन संस्थान, जयपुर

स्टाफ नहीं, निगरानी कहां से करें: हमारे पास इतना स्टाफ नहीं है कि बहाव क्षेत्र में अतिक्रमण रोकने के लिए रोजाना चौकीदारी करवा सकें। समय-समय पर हमने फील्ड में निरीक्षण किया, पंचायतों और संबंधित बीडीओ को पत्र लिखे। पहले 2 मीटर ऊंचाई तक के चेकडेम और एनीकट बनाने के लिए हमसे एनओसी लेना जरूरी था, लेकिन किसी भी एनीकट के लिए एनओसी नहीं ली गई। अब तो सरकार ने कैचमेंट एरिया में एनीकट बनाने पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी। - रमाशंकर शर्मा, एईएन (रामगढ़ बांध), सिंचाई विभाग

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