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रविवार, 29 जनवरी 2012

पहाड़ों, नदियों, झीलों और घने जंगलों का देश नेपाल!




काठ के घरों का काठमांडू
अपनी बेजोड़ काष्ठकला के लिए विख्यात काठमांडू चारों तरफ से पहाड़ों से घिरा हुआ है। शुरुआती दौर में यहां सिर्फ लकड़ी के मकान थे। काठ के मांडू (मकानों) के कारण ही इसका नाम काठमांडू पड़ा। जाने लगा है।

१४वीं शताब्दी का पशुपतिनाथ मंदिर

छठी शताब्दी का बौद्धनाथ स्तूप 
१४वीं शताब्दी के पशुपतिनाथ मंदिर और छठी शताब्दी के बौद्धनाथ स्तूप नेपाल के अराध्य होने के साथ प्रमुख धार्मिक स्थलों में शुमार हैं। माना जाता है कि नेपाल की यात्रा पशुपतिनाथ मंदिर और बौद्धनाथ स्तूप देखे बिना पूरी नहीं कही जा सकती। यही कारण है कि काठमांडू में इन दोनों जगहों पर पर्यटकों और दर्शनार्थियों का दिनभर रैला लगा रहता है। पशुपतिनाथ मंदिर में शिवलिंग के चार दरवाजों से दर्शन किए जा सकते हैं। विशाल बौद्धनाथ स्तूप पर ऊं मणि पदमैभ्यूम मंत्र का जाप लगातार चलता रहता है।


 मनोकामना के लिए केबल कार का सफर
त्रिशूली नदी के साथ चलते काठमांडू से नारायण गढ़ के पहाड़ी रास्ते के बीच एक जगह है मुगलिंग। यहां 1302 मीटर ऊंचाई पर पहाड़ के ऊपर है मनोकामना देवी का मंदिर। मंदिर तक जाने के लिए केबल कार का सफर तय करना पड़ता है। नदी और पहाड़ों के ऊपर से केबल कार का यह सफर बेहद रोमांचक है। करीब 16 मिनट का केबल कार का सफर पूरा करने के बाद पहुंचते हैं मनोकामना देवी मंदिर।


लेकसिटी पोखरा में देखिए सोने के पहाड़
काठमांडू से 200 किमी पश्चिम की ओर स्थित है पोखरा शहर। बेहद शांत और सुंदर। इसे झीलों की नगरी भी कहा जाता है। ..समुद्रतल से 1590 मीटर ऊंचाई पर स्थित सारंगकोट यहां का सनराइज प्वाइंट है। सनराइज प्वाइंट पर सुबह-सवेरे मनोरम दृश्य रहता है।


पोखरा का विंध्यवासिनी मंदिर।


पोखरा की पेवा लेक


माउंटेन फ्लाइट में कॉकपिट से लिया गया फोटो। सामने समुद्र की तरह दिखाई दे रही है बादलों की परत। इन बादलों से भी ऊंची दिख रही है हिमालय की कई चोटियां







लुंबिनी बौद्ध धर्म अनुयायियों की आस्था का प्रमुख केंद्र। 2623 साल पहले यहीं हुआ था गौतम बुद्ध का जन्म। लुंबिनी में बुद्ध के जन्मस्थल के आसपास के 10 वर्ग किमी क्षेत्र को वल्र्ड पीस पार्क के नाम से जाना जाता है। यहां नेपाल के अलावा चीन, कोरिया, भारत समेत विभिन्न देशों के लोग मेडिटेशन और शांति के लिए आते हैं।


















यहां मैदान कम, पहाड़ पर ही बने हैं ज्यादातर मकान।


एक गांव में धूप सेंकता नेपाली परिवार


काठमांडू में एक कार्यक्रम के दौरान नेपाल टयूरिज्म बोर्ड के सीनियर ऑफिसर दीपक जोशी से बातचीत के क्षण। साथ में है डीडी न्यूज दिल्ली के नीरज सिंह और प्रवीण जौहर।


नेपाल करेंसी।












चितवन नेशनल पार्क में एलीफेंट सफारी
नारायणगढ़ से करीब 25 किमी दूर घने जंगल में स्थित है चितवन नेशनल पार्क। यहां हाथी सफारी पर्यटकों के लिए खास आकर्षण है। हाथी पर बैठकर पर्यटकों को चितवन नेशनल पार्क में घुमाया जाता है। पार्क में गैंडे, टाइगर और मगरमच्छों की संख्या काफी है। करीब तीन घंटे की सफारी के दौरान वे क्षण रोमांच पैदा करते हैं जब जंगली जानवर बिल्कुल पास से गुजरते दिखाई देते हैं।










यहां मैदान कम, पहाड़ पर ही बने हैं ज्यादातर मकान।


पहाड़ों में ऐसे तैयार किए जाते हैँ घुमावदार सीढिनुमा खेत।




लेकसिटी पोखरा में देखिए सोने के पहाड़
काठमांडू से 200 किमी पश्चिम की ओर स्थित है पोखरा शहर। बेहद शांत और सुंदर। इसे झीलों की नगरी भी कहा जाता है। ..समुद्रतल से 1590 मीटर ऊंचाई पर स्थित सारंगकोट यहां का सनराइज प्वाइंट है। सनराइज प्वाइंट पर सुबह-सवेरे मनोरम दृश्य रहता है। सूरज की पहली किरण हिमालय की बर्फ से लदी अन्न्पूर्णा चोटी पर पड़ती है तो लगता है जैसे पहाड़ नहीं सोने का ढेर चमक रहा है।








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  काठमांडू का दरबार स्क्वायर


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